Tuesday, March 18, 2014

संकटमोचन हनुमानाष्टक और उसके लाभ !

                 संकटमोचन हनुमानाष्टक

संकट मोचन हनुमानाष्टक हिंदू देवता हनुमान की साहस, शक्ति, आत्मविश्वास और भक्ति की प्रशंसा में आठ कविता प्रार्थना है !

हनुमान भी शिव के अवतार माने जाते है जो लंका के राजा रावण के अंतर्गत वर्गीकृत की गई बुरी ताकतों पर काबू पाने के लिए श्री राम (विष्णु के अवतार) की मदद करने के लिए प्रकट हुए !

यह प्रार्थना बुराई पर अच्छाई की जीत का वर्णन करता है, हनुमान की मदद से रावण के ऊपर श्री राम की जीत की !
संकट मोचन हनुमानाष्टक दुश्मनों से बाधाओं, खतरों, और परेशानी को दूर करने के क्रम में पूरे भारत में हनुमान जी के भक्तों द्वारा जपि जाती हैं !

संकट मोचन हनुमानाष्टक का सस्वर पाठ ग्रहों, विशेष रूप से शनि और मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव से मदद करता है !

यह प्रार्थना ज्य़ादातर शनिवार और मंगलवार (शनि और मंगल ग्रह की साप्ताहिक दिन) को हनुमान मंदिरों में जपि जाती है !

हनुमानाष्टक के लाभ :
  • भगवान हनुमान की आप और आपके परिवार के सदस्यों पर कृपा होना !
  • भगवान हनुमान भविष्य में सब खतरों, रोगों और बदकिस्मती से बचाते है !
  • बच्चों और परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य के लिए !
  • अदालत में और व्यापार में सफलता !
  • शैक्षिक मामलों में सफलता !
संकटमोचन हनुमानाष्टक
।। मत्तगयन्द छन्द ।।
बाल समय रवि भक्ष लियो तब, तीनहुं लोक भयो अँधियारो ।
ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो ।।
देवन आनि करी विनती तब, छांड़ि दियो रवि कष्ट निहारो ।
को नहिं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ।। 1 ।।

बालि की त्रास कपीस बसै गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो ।।
चौंकि महामुनि शाप दियो तब, चाहिये कौन विचार विचारो ।
कै द्घिज रुप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के शोक निवारो ।। 2 ।।

अंगद के संग लेन गए सिय, खोज कपीस यह बैन उचारो ।
जीवत न बचिहों हम सों जु, बिना सुधि लाए इहां पगु धारो ।
हेरि थके तट सिंधु सबै तब, लाय सिया सुधि प्राण उबारो ।। 3 ।।

रावण त्रास दई सिय को तब, राक्षसि सों कहि सोक निवारो ।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु, जाय महा रजनीचर मारो ।
चाहत सीय अशोक सों आगि सु, दे प्रभु मुद्रिका सोक निवारो ।। 4 ।।

बाण लग्यो उर लक्ष्मण के तब, प्राण तजे सुत रावण मारो ।
लै गृह वैघ सुषेन समेत, तबै गिरि द्रोण सु-बीर उपारो ।
आनि संजीवनी हाथ दई तब, लक्ष्मण के तुम प्राण उबारो ।। 5 ।।

रावण युद्घ अजान कियो तब, नाग की फांस सबै सिरडारो ।
श्री रघुनाथ समेत सबै दल, मोह भयो यह संकट भारो ।
आनि खगेस तबै हनुमान जु, बन्धन काटि सुत्रास निवारो।।6।।

बन्धु समेत जबै अहिरावण, लै रघुनाथ पाताल सिधारो ।
देवहिं पूजि भली विधि सों बलि, देउ सबै मिलि मंत्र विचारो ।
जाय सहाय भयो तबही, अहिरावण सैन्य समैत संहारो ।। 7 ।।

काज किये बड़ देवन के तुम, वीर महाप्रभु देखि विचारो ।
कौन सो संकट मोर गरीब को, जो तुमसो नहिं जात है टारो ।
बेगि हरौ हनुमान महाप्रभु, जो कछु संकट होय हमारो ।। 8 ।।

।। दोहा ।।
लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर ।
बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर ।।




हनुमानाष्टक के वीडियो को डाउनलोड करें:-




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